एक पुलिस का जवान कानून व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिये पुलिस में भर्ती होता है, लेकिन पुलिस अधीक्षक उसे अपने घर पर अपनी और अपने परिवार की चाकरी में तैनात कर देता है। (जो अपने आप में आपराधिक न्यासभंग का अपराध है और इसकी सजा उम्र कैद है) जहॉं उसे केवल घरेलु कार्य करने होते हैं-ऐसा नहीं है, बल्कि उसे अफसर की बीवी-बच्चियों के गन्दे कपड़े भी साफ करने होते हैं। क्या यह उस पुलिस कॉंस्टेबल के सम्मान का बलात्कार नहीं है?
मेरे शुभचिंतक और समालोचक जिनके विश्वास एवं संबल पर मैं यहाँ लिख पा रहा हूँ!
‘यदि आपका कोई अपना या परिचित पीलिया रोग से पीड़ित है तो इसे हलके से नहीं लें, क्योंकि पीलिया इतना घातक है कि रोगी की मौत भी हो सकती है! इसमें आयुर्वेद और होम्योपैथी का उपचार अधिक कारगर है! हम पीलिया की दवाई मुफ्त में देते हैं! सम्पर्क करें : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, 098750-66111
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Friday, December 21, 2012
बलात्कार से निजात कैसे?
Thursday, March 10, 2011
सभी लोक सेवक कृपया याद रखें!
सभी लोक सेवक कृपया याद रखें!
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' / Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
जब एक लोक सेवक (जनता का नौकर), जनता के प्रति अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह कानून द्वारा अधिरोपित ईमानदारी से, निष्ठा से और कानून में निर्धारित समय पर/में नहीं करता है तो उससे वह जनता के अधिकारों का हनन कर रहा होता है, जिससे लोक सेवक (जनता का नौकर) द्वारा विभागीय एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 406 तथा 409 आदि में वर्णित कानूनों का उल्लंघन होता है और कानून का उल्लंघन ही अपराध का निर्माण करते हैं, जिसके लिए कानून में सजा का प्रावधान है.
लोक सेवक (जनता का नौकर) कुर्सी के मद में अकेला ही मनमानी करता है, लेकिन सजा उसके पूरे परिवार को भुगतनी पड़ती है. पकडे जाने और सजा मिलने पर बच्चों का जीवन बर्बाद हो जाता है. ऐसे लोक सेवक (जनता
के
नौकर), जनता में असंतोष पैदा करने का कारण भी बनते हैं, ऐसे लोक सेवकों के कारण लोकप्रिय एवं लोकतान्त्रिक सरकारें बदनाम होती हैं.
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