लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सामने हैं और राजनेता राजनीतिक भाषणबाजी के प्रदूषण की लपेट में मतदाता को गुमराह करने में पीछे नहीं हैं। किसी भी जनतान्त्रिक शासन व्यवस्था में चुनाव लोकतन्त्र का वो पावन पर्व होता है, जिसमें जनता को अपने पिछले चुने हुए प्रतिनिधियों से पांच वर्ष के कार्यकाल का लेखाजोखा पूछने का एक संवैधानिक अवसर होता है, जबकि अगले पांच वर्ष के लिये अपने क्षेत्र की जरूरतों