संसार में जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें से अधिकतर के पीछे धार्मिक कारण रहे हैं। धर्म या धार्मिक लोगों या कथित धार्मिक महापुरुषों ने कितने लोगों को जीवनदान दिया, इसका तो कोई पुख्ता और तथ्यात्मक सबूत नहीं है, लेकिन हम देख रहे हैं कि धर्म हर रोज ही लोगों को लीलता जा रहता है। ऐसे में क्या मानव निर्मित धर्म के औचित्य के बारे में हमें गम्भीरता से सोचने की जरूरत नहीं है?
मेरे शुभचिंतक और समालोचक जिनके विश्वास एवं संबल पर मैं यहाँ लिख पा रहा हूँ!
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Wednesday, October 16, 2013
मानव-निर्मित धर्म की क्रूरता से खुद को बचायें
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