पहले समाज सेवा और लोगों को जोड़ने के लिये संत एवं नेता पैदा हुआ करते थे, जबकि आज समाज को तोड़ने के लिये भी प्रायोजित तरीके से साधु-संत और नेता पैदा किये जा रहे हैं। पहले अखबार दबी-कुचले लोगों की आवाज हुआ करते थे, जबकि आज धनाढ्यों की आवाज हैं। पचास साल बाद इन सबके कु-प्रतिफल क्या होंगे? कल्पना करना असम्भव है!
मेरे शुभचिंतक और समालोचक जिनके विश्वास एवं संबल पर मैं यहाँ लिख पा रहा हूँ!
‘यदि आपका कोई अपना या परिचित पीलिया रोग से पीड़ित है तो इसे हलके से नहीं लें, क्योंकि पीलिया इतना घातक है कि रोगी की मौत भी हो सकती है! इसमें आयुर्वेद और होम्योपैथी का उपचार अधिक कारगर है! हम पीलिया की दवाई मुफ्त में देते हैं! सम्पर्क करें : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, 098750-66111
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Monday, July 29, 2013
हम विषेल पौधों की अनदेखी कर रहे हैं, पचास साल बाद हर घर में उग आयेंगे!
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