मेरे शुभचिंतक और समालोचक जिनके विश्वास एवं संबल पर मैं यहाँ लिख पा रहा हूँ!

यदि आपका कोई अपना या परिचित पीलिया रोग से पीड़ित है तो इसे हलके से नहीं लें, क्योंकि पीलिया इतना घातक है कि रोगी की मौत भी हो सकती है! इसमें आयुर्वेद और होम्योपैथी का उपचार अधिक कारगर है! हम पीलिया की दवाई मुफ्त में देते हैं! सम्पर्क करें : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, 098750-66111
Showing posts with label मंजिल. Show all posts
Showing posts with label मंजिल. Show all posts

Tuesday, May 31, 2011

सपनों के कातिल!


गैरों की दुनियॉं में-
कहॉं थे इतनी बेदर्द इंसान?
जो गिरा देते मुझको,
अपनी मंजिल की राहों से|
दर्द तो मैंने खुद ही ने चुना है,
छू कर मंजिल को लौट आया मैं|
उन अपनों के सपनों की खातिर-
रुक कर दौड़ से अधबीच में|
झुक गया था, जिनके लिये मैं,
वे ही हैं, मेरे अरमानों के कातिल|
मेरे सपनों के कातिल, मेरे अपने हैं|
जिनके खोखले सपनों के दमकते-
महलों की नींव के मजबूत पत्थर,
मेरे सपनों की कब्रगाह पर चुने गये हैं|

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'